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इंडियन पवेलियन दुबई एक्स्पो देश के लिए गौरव की बात पर NBCC की भूमिका सवालों के घेरे में ?

मोदी सरकार का ये कदम पूरी दुनिया में एक छाप छोड़ेगा और हिंदुस्तान का नाम रोशन करेगा, हिंदुस्तान के वज़ीरे आज़म आली ज़नाब नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी  का ये क़दम आगे चलकर  एक मील का पत्थर साबित होगा जिसे भारतवासी और ख़ास कर दुबई में रहने वाले भारतीय और विदेशी नागरिक हमेशा हमेशा याद करेंगे, सरकारें आती जाती रहती हैं पर सरकार के जो अच्छे काम होते हैं नागरिक उनकी प्रशंसा हमेशा करते हैं और इस तरह के काम नागरिकों के दिलों में एक छाप छोड़ जाते हैं।

जिनके खुद के घर शीशे के हों, वो दूसरों के घर पर पत्थर नही मारा करते, बहुत ही मशहूर फ़िल्मी डायलाग है, पर आज हम अपनी इस स्टोरी में किसी के घर का नही बल्कि भारत सरकार के एक नवरत्न उपक्रम के उन दो अधिकारियों की भूमिका पर चर्चा करेंगे जिन्होंने एक दूसरे के गुनाहों पर पर्दा डाला है, गुनाह भी ऐसे हैं कि अगर सही जाँच हो जाए तो दोनो को जेल की चक्की पीसने से कोई नही रोक सकता ऐसा हमारे अंडर कवर रिपोर्टर का कहना है हमारे रिपोर्टर के इस दावे में कितनी सच्चाई है ये जाँच का विषय हो सकता है, पर हमारे संज्ञान में जो तथ्य लाए गए हैं वो हम अपने पाठकों के सामने रख रहे हैं।
ऐसा संज्ञान में लाया गया है कि वाणिज्य मंत्रालय का एक प्रोजेक्ट इंडियन पवेलियन दुबई एक्स्पो २०२० बनाने की ज़िम्मेदारी नवरत्न कम्पनी NBCC को दी गई थी, NBCC ने प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया नतीजा भारत का नाम दुनिया में रोशन करने वाली एक बिल्डिंग खड़ी हो गई जिसका उदघाटन  भारत सरकार के मंत्री द्वारा दुबई में किया जा रहा है, देश के हर नागरिक के लिए ये एक स्वाभिमान का विषय है ।दुबई के अंदर हर भारतीय को इस बिल्डिंग से हिंदुस्तान की याद तरोताज़ा होती रहेगी या यूँ कहें कि एक अपनेपन का एहसास होता रहेगा।

मोदी सरकार का ये कदम पूरी दुनिया में एक छाप छोड़ेगा, हिंदुस्तान का नाम रोशन करेगा, हिंदुस्तान के वज़ीरे आज़म आली ज़नाब नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी  का ये क़दम आगे चलकर  एक मील का पत्थर साबित होगा जिसे भारतवासी और ख़ास कर दुबई में रहने वाले भारतीय और विदेशी नागरिक हमेशा हमेशा याद करेंगे, सरकारें आती जाती रहती हैं पर सरकार के जो अच्छे काम होते हैं नागरिक उनकी प्रशंसा हमेशा करते हैं और इस तरह के काम नागरिकों के दिलों में एक छाप छोड़ जाते हैं।

पर जैसा आम रिवाज़ है कि सरकारी काम क़ाज में कुछ ना कुछ गड़बड़ियों के इल्ज़ामात और तोहमदें नाफ़िद होतीं हैं वैसा ही इस प्रोजेक्ट में भी हुआ, NBCC के इस प्रोजेक्ट को शुरू करते ही ये विवाद के घेरों में आ गया NBCC के अफसरानों  कि भूमिका की शिकायत समबंधित अफसरानों को मिलने लगी, हमारी जानकारी के अनुसार ऐसी ही एक शिकायत केन्द्रीय सतर्कता ब्यूरो (CVC) को मिली थी, शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में तय माप दंडो के मुताबिक़   कार्य करने वाले ठेकेदार को ना चुन कर  अफ़सरानो के अपने क़रीबियों के ठेकेदार को कार्य देने का  इल्ज़ामात NBCC के अधिकारीयों पर नाफ़िद किए थे, शिकायत में इस बात का ज़िक्र किया गया था कि इस कार्य को करवाने के लिए जिस ठेकेदार का चयन किया गया है उसमें  अधिकारियों ने हेराफेरी की है कार्य को कराने के लिए ऐसे ठेकेदार का चयन किया गया है जो तय किए गए माप दंडो में खड़ा नही उतरता है और ना ही उसको किसी तरह का कोई इंटर्नैशनल प्रोजेक्ट बनाने का कोई अनुभव है, जबकि दूसरे कई ऐसे ठेकेदारों ने भी इस कार्य को करने के लिए टेंडर डाले थे जो दुनिया के मशहूर ठेकेदारों में से एक हैं और कई इंटर्नैशनल प्रोजेक्ट बना चुके हैं, पर उनको इस कार्य से वंचित कर दिया गया। मामले की गम्भीरता को देखते हुए CVC ने ये  शिकायत विवेचना के लिए  सम्बंधित विभाग NBCC में उस समय कार्यरत CVO संजीव स्वरूप को भेजी। हम इस बात का कोई दावा नही करते कि विवेचना की रिपोर्ट क्या थी  पर हमारे सूत्र ये बता रहे हैं कि इस पूरे प्रकरण में घोटाले की सुई पूरी तरह से TSC (टेंडर स्क्रूटनी कमेटी) के हेड पर घूमती है, जानकारी के अनुसार उस समय TSC को हेड करने वाली NBCC में नियुक्त वित्त अधिकारी थीं जिनके कांधो पर टेंडर में भाग लेने वाले ठेकेदारों में से माप दंडों को पूरा करने वाले ठेकेदार को चुन कर इस काम को क्रियानवण  कराने की ज़िम्मेदारी थी , शिकायतकर्ता के मुताबिक़ इस अधिकारी ने अपने इस कार्य को ईमानदारी से नही किया ? क्यूँ ऐसाकिया गया ये जाँच का विषय है जिसकी  जाँच होना भी चाहिएँ थी।

अँतोगताह CVO ने अपनी विवेचना पूरी करने के बाद  NBCC के CMD के सम्मुख इस रिपोर्ट को पटल पर रखा CMD को सम्बंधित विभाग के अफसरानों को मेमो देने की अनुशंसा की थी , सूत्रों का कहना है कि अनुशंसा के मुताबिक़ रोकड़ा विभाग,TSC के हेड और कुछ और अफसरानों को मेमो देने की सिफ़ारिश की गई थी पर  केवल दो निम्न वर्ग के अफ़सरानो को नोटिस दे कर इतिश्री कर दी गई , जानकार ये बता रहे हैं जब CMD ने TSC को हेड  कर रही अफ़सर को मेमो देने की बात कही तो अधिकारी CMD पर भड़क गयीं और कहा अगर आपने मुझे या मेरे किसी भी अधिकारी को मेमो दिया तो आपके कारनामों को सड़क पर उजागर कर दूँगी, क्यूँकि आपने भी एक प्रोजेक्ट में ग़लत तरीक़े से आठ हज़ार  के टेंडर अवार्ड किए हैं, अगर में ग़लत हूँ तो ग़लत आप भी हैं रायता फैला दुंगी ‘मरता क्या न करता’ CMD ने भी चुप्पी साध ली।

पोर्टल ने इस पूरे मामले की सच्चाई को समझने के लिए समाचार के आँकलन से पहले कई बार NBCC के मुख्यालय में सम्पर्क किया ताकि उपरोक्त विषय में NBCC के समबंधित अफ़सरानो की बात भी इस समाचार के आँकलन में शामिल की जा सके पर  हमेशा NBCC के CMD सचिवालय से एक ही उत्तर दिया गया कि अभी साहब बिजी हैं , मीटिंग में हैं, आपको काल बैक करा दिया जाएगा, कई बार तो पूरा विषय भी उनके संज्ञान में लाया गया पर फिर भी ढाक  के तीन पात , साहब अभी बिजी हैं , साहब अभी मंत्रालय गए हैं, तक़रीबन PSU में ये एक तय फ़ार्मूला है जिसे इस्तेमाल किया जाता है पता नही इसकी ट्रेनिंग कहाँ से दी जाती है पर जहां से भी दी जाती हो वो विभाग अवार्ड का पात्र तो है। हमने इस विषय में वाणिज्य मंत्रालय से सम्पर्क किया विभाग के सचिव के कार्यालय ने अवगत कराया कि आप इस विषय में अतिरिक्त साचिव किशोर जी से बात करें वही आपको इस बारे में जानकारी दे पाएँगे उनसे भी सम्पर्क किया गया उनके यहाँ भी ट्रेनिंग वाले बुद्धिमान ज़ज्मान ने रटा रटाया राग दोहराया साहब अभी मीटिंग में हैं आपको काल बैक करा दिया जाएगा अंत में हमने  सूचना अधिकार आधिनियम २००५  के तहत दिए गए सूचना के अधिकार का इस्तेमाल किया पर अफ़सोस NBCC के अफसरानों ने हमें उससे भी वंचित कर दिया इस प्रोजेक्ट से संबंधित कोई भी सूचना उपलब्ध नही कराई गई, मामला अपील में लम्बित है । उपरोक्त विषय में NBCC के CMD कार्यालय से फिर सम्पर्क किया गया तो एक कार्य तो हुआ  NBCC क़ाबिल अधिकरीयों ने NBCC के सरकारी  ट्विटर हैंडल से हमारे पोर्टल को ब्लॉक कर दिया ताकि NBCC में हो रही गड़बड़ियों की न्यूज़ NBCC के ट्विटर पर ना पहुँच सके पोर्टल ने प्रधानमंत्री मंत्री कार्यालय से दख़ल देने की माँग की मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय ने दख़ल दिया तब NBCC के अधिकारियों ने इसे त्रुटि कह कर ट्विटर से अनब्लॉक किया, CMD कार्यालय में तैनात एक अधिकारी ने तो यहाँ तक कहा आप को जितनी न्यूज़ लिखनी है आप लिखें हमें या CMD को इससे कोई फ़र्क़ नही पड़ता।

पोर्टल ने इस मामले की जानकारी वाणिज्य मंत्रालय में नव नियुक्ति साचिव से भी साझा की है, सवाल ये है कि अगर एक अनियमित ठेकेदार को चुना गया तो अफसरानों की मंशा क्या थी ? और अगर भविष्य में इस बिल्डिंग में कोई हादसा होता है तो इसकी ज़िम्मेदारी किस की होगी ? हमारा ऐसा मत है कि उपरोक्त विषय में दोनो प्रकरणो की जाँच होना चाहिएँ जो NBCC के अधिकारी एक दूसरे पर लगा रहे हैं, आठ हज़ार के काम किए गए अवार्ड की भी और TSC को हेड करने वाले अधिकारी की भी , तभी इस इस रहस्य से पर्दा उठ पाएगा की आख़िर रायता फैला क्यूँ नही ?

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