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Indian Administration

राम जैसा किरदार है मेरा, मुझे ……..तरह पेश किया गया -पूर्व महासचिव

राम जैसा किरदार है मेरा, मुझे ……..तरह पेश किया गया -पूर्व महासचिव

आज दशहरा है यानी वो दशवां दिन है जब सियापति श्री राम चंद्र जी ने महाविद्वान अपनी मृत्यु पर विजय पाने वाले लंकेस्पति रावण की नाभि में तीर मार कर रावण के विनाश का अंत किया, और लंका पर अपनी विजय का पताका लहराया।पर पाठकों हम यहाँ दशहरा का ज़िक्र इस लिए कर रहे हैं कि दिलशाद कालोनी में भी चरित्र हरण और राज काज की एक लीला चल रही है, प्रभु श्री राम की लीला का मंचन तो दस दिनों में पूरा कर लिया गया पर कालोनी की राज़ रूपी लीला कब ख़त्म होगी इसका अंदाज़ा महरभारत के संजय को भी नहीं है।

संजय तो सिर्फ़ दूर से देख कर बता रहे हैं अपडेट दे रहे हैं कि महाराज आज मामला SDM कोर्ट चला गया, महाराज आज मामला कोर्ट चला गया, महाराज अब कालोनी के गार्डों के लिए पैसा इकट्ठा हो गया, और महराज़ उनसे फ़रमा रहे हैं ये सब तो ठीक है संजय पर तू अपनी दिव्य दृष्टि से मुझे ये बता इसका अंत कब होगा निगम के चुनाव आने वाले हैं, कब कालोनी के जीते हुए सदस्यों को चार्ज मिलेगा, संजय फ़रमाते हैं महाराज अगर हारने वाले पैनल में कैकई ने सलाह ना दी होती तो मामला कोर्ट में ना जाता पर केकई लंदन में बैठ कर सलाह दे रही थी और अपना किरदार राम जैसा बताने वाले रावण की तरह घमंड में चूर चूर हो कर केकई की सलाह पर अमल कर रहे थे। प्रभु श्री राम ने अपने अनुज के लिये राज़ काज के मोह को त्याग दिया और भरत के हाथों गद्दी सौंप कर 14 वर्ष के वनवास के लिए तशरीफ़ ले गये, पर कालोनी में जब चुनाव हर कर चार्ज देने की बारी आई तो चार्ज की जगह ठेंगा दिखाया जा रहा है, महज़ सिर्फ़ पाँच साल की की बात है और राज काज़ का मोह जकड़े हुए है, उँगलियाँ कालोनी के एक भरत पर भी है कि RWA के चुनाव के दिन भरत ने भी खड़ाऊँ की जगह फर्जी वोट डलवाने में अहम भूमिका निभाई।

प्रभु श्री राम तो आज रावण की अमृतभरी नाभि में तीर चला कर बुराई पर अच्छाई की जीत का पटाखा लहरा कर लंका को लंकवासियों के हवाले कर अपनी नगरी वापस चले जाएँगे पर कालोनी में जीते हुए पैनल को चार्ज कब मिलेगा और कब उनके राज़ तिलक होंगे इसका अंदाज़ा लगाना अब के हालातों में ना मुमकिन सा लग रहा है, पर एक चौपाई है।।जाको प्रभु दारुण दुख देहि ताकी मति पहले हर लेहि।। इस मामले में प्रभु किसकी मति हर रहे हैं ये यहाँ के निवासियों और हमारे पाठकों को ख़ुद सोचना पड़ेगा इस मामले में हम “चुप रहेंगे “

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