आदिवासी कल्याण योजनाओं के लाभों में संभावित कटौती का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पात्र लोगों को अलग-अलग योजनाओं का पूरा लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने लाड़ली बहना योजना के भुगतान का उल्लेख करते हुए सरकारी सहायता के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा कि यदि किसी व्यक्ति को एक योजना से पैसा मिलता है तो उसके कारण दूसरी योजना का लाभ नहीं काटा जाना चाहिए। उनके अनुसार, सरकार दो योजनाएं चला रही है तो पात्र लाभार्थियों को दोनों का फायदा मिलना चाहिए।
उन्होंने इस विषय को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी व्यापक सहायता के साथ जोड़ा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं और अस्पताल तथा स्कूल जैसी सेवाएं दी जानी चाहिए।
उनके वक्तव्य में बीमारी और कुपोषण के कारण बच्चों की मृत्यु का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि कई प्रभावित परिवारों को मुआवजा नहीं मिला है और आधे लोग अब भी भुगतान की प्रतीक्षा में हैं।
जमीन और आजीविका से जुड़े विषयों पर राहुल गांधी ने वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टे जारी करने की मांग की। उन्होंने मनरेगा को संचालित करने और रोजगार सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
राहुल गांधी ने कहा कि क्षेत्र की स्थिति देखकर उन्हें दुख हुआ। उन्होंने कांग्रेस की सरकार आने पर समुदाय की मदद करने की बात कही और बताया कि कांग्रेस वन अधिकार विधेयक लाई थी।
उन्होंने आदिवासी समुदाय को देश का पहला मालिक बताते हुए कहा कि उसे देश में उचित स्थान के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार मिलना चाहिए। उनका वक्तव्य योजनाओं के समन्वय से लेकर जमीन के अधिकार और सार्वजनिक सेवाओं तक केंद्रित रहा।






































