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न तो NRC देश के मुसलमान के खिलाफ है और न ही CAA

(Sakthivel)NRC को लेकर जिस तरह से भारत के सभी मुसलमानों को डराया जा रहा है वह तथ्य से बिल्कुल परे है। भारत में कुल लगभग 20 करोड़ मुसलमान रहते हैं जो भारत की कुल जनसंख्या में 15% है। जहां तक NRC की बात है वह सिर्फ उन लोगों को चिन्हित करना है जो बांग्लादेश से घुसपैठ कर गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रहे हैं। भारत में गैरकानूनी तरीके से रहने वालों की संख्या कांग्रेस पार्टी के ही अपने एक आकलन के हिसाब से लगभग एक करोड़ है। इन बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित करने की प्रिक्रिया जिसे NRC कहते हैं जो कांग्रेस सरकार द्वारा ही 1951 में लाया गया था उस प्रिक्रिया को देश के 20 करोड़ मुसलमानों से जोड़कर डर दिखाकर हिंसा फैलाना के लिए उकसाना सरा सरा गलत है। मुस्लिम वोट बटोरने के मकसद से पूरे देश को जलाने की साजिश कांग्रेस और कुछ अन्य राजनीतिक दलों द्वारा रची जा रही है जिससे देश के अमन और शांति बिगड़ी है।

जहां तक नागरिकता संशोधन कानून 2019 की बात है, इसे लेकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है जैसे यह कानून किसी विशेष धर्म के खिलाफ है या किसी की नागरिकता छीनने के मकसद से बनाया गया है जबकि यह कानून पड़ोसी इस्लामिक देशों में धर्म के नाम पर प्रताड़ित लोग जो भारत में अपनी बीवी बेटियों की अस्मिता एवं अपने परिवार की जान बचाने केलिए सालों से शरण लिए हुए हैं उन्हें नागरिकता देने का कानून है। और जहां तक बांग्लादेश, पाकिस्तान से गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रहे मुसलमानों को नागरिकता नही देने की बात है, उन्हें इसलिए नही दिया जा सकता क्योंकि इन देशों के मुसलमान धार्मिक आधार पर प्रताड़ित नही हैं। ऐसा भी नही है कि NRC के जरिए बांग्लादेश से आये सभी को चिन्हित किया जा रहा है । NRC के जरिए सिर्फ उन्हीं को चिन्हित किया जा रहा है जो 1971 के बाद गैरकानूनी तरीके से भारत में आये हैं। उससे पहले आये लोग भारत में ही रहेंगे।अब सवाल आता है कि गैर मुसलमानों को क्यों 2014 कट ऑफ डेट रखा है तो इसका जवाब यह है कि अभी भी गैर मुसलमान को पाकिस्तान और बांग्लादेश में अलसंख्यक हैं उनके साथ धर्म के आधार पर लगातार प्रताड़ना हो रही है जिसके चलते वहां से भागने को मजबूर हैं।अगर कोई मुस्लिम पाकिस्तान, बांग्लादेश में अपने आपको प्रताड़ित महसूस करते हैं तो भारत नागरिकता कानून 1955 के तहत वह भी नागरिकता ले सकते हैं।

 (Working as senior news analyst with a political organisation.)

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