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PESB द्वारा की गई नियुक्ति की सिफ़ारिश से NHPC में कहीं ख़ुशी कहीं ग़म

नई दिल्ली: हाल ही में देश की सबसे बड़ी हाइड्रो पॉवर कंपनी NHPC के निदेशक परियोजना नियुक्ति के लिए की गई PESB की सिफ़ारिश से NHPC के अफ़सरों एवं कर्मचारियों में कहीं ख़ुशी कहीं ग़म का माहौल है।
जहां कुछ अफ़सर इस नियुक्ति के विरोध में हैं, वहीं कुछ इस का समर्थन कर रहे हैं। एक्सपर्टों के अनुसार, SJVN के संभावित CMD को NHPC के निदेशक परियोजना की ज़िम्मेदारी देने से PESB ने एक सकारात्मक कदम उठाया है, जबकि कुछ लोग इसे NHPC परिवार के साथ ना इंसाफ़ी का रूप मान रहे हैं, उनके मुताबिक़ ऐसा लगता है कि जैसे सब कुछ पहले से ही ठीक से फिक्स हो चुका था,सिर्फ़ PESB की स्टाम्प लगाना बाक़ी थी।
NewsIP से वार्तालाप में ऊर्जा सेक्टर के एक्सपर्टो ने भी अपना पक्ष रखा है, एक एक्सपर्ट के मुताबिक़ SJVN के प्रोजेक्ट्स जिस तरह से फैले हुए हैं, ऐसे समय में संजय जी की NHPC में नियुक्ति SJVN के लिए एक बड़ा नुक़सान साबित हो सकता है,इस की भरपाई SJVN कैसे करेगा कुछ कहा नहीं जा सकता ।
दूसरे एक्सपर्ट के अनुसार, NHPC के अफ़सर अगर किसी काम को अंजाम तक पहुँचाने में नाकाम रहेंगे तो स्वाभाविक है कि बाहरी लोगों को मौक़ा दिया जाएगा इस नियुक्ति में भी ऐसा ही हुआ जो लोग इस पैनल में शामिल थे वो अपने काम और अपने आउटपुट के बारे में बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, मेरा मत है कि NHPC में जिन अफ़सरों का काम में मन नहीं लगता, उन्हें VRS ले लेना चाहिए।
लेकिन एक राय ये भी आ रही है चलो मान लिया जाये कि NHPC में काबिल अफ़सर नहीं मिले तो फिर प्राइवेट सेक्टर से आवेदन करने वाले उम्मीदवार  को मौक़ा क्यों नहीं दिया गया , जबकि सूत्र ये बता रहे हैं कि प्राइवेट सेक्टर से आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास तजुर्बा भी था और कार्यकाल भी ?

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