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बाँदा में नहरों की बदहाली और करोड़ो के घोटाले की आशंका

भ्रस्ट अधिकारियों की कार्यशैली के चलते आज भी प्रदेश की जनता को विकास सिर्फ कागज़ में देखने को मिल रहा है बाँदा में नहरों की सफाई और मरम्मत के लिए शासन द्वारा भेजे गए 1.5 करोड़ भ्रस्ट अधिकारियो के भ्रस्टाचार की भेंट चढ़ गए और नहरों की हालत ज्यूँ की त्यूं बनी हुई है ।

(बाँदा,गुल मो)सूबे के मुखिया चाहे जितनी योजनाओ का शिलान्यास करदे या फिर विकास कार्यो का पिटारा खोल दें पर भ्रस्ट अधिकारियों की कार्यशैली के चलते आज भी प्रदेश की जनता को विकास सिर्फ कागज़ में ही देखने को मिल रहा है । ऐसा ही एक नमूना बाँदा जनपद में देखने को मिला है जहाँ जल संसथान के भ्रस्ट अधिकारियों के भ्रस्टाचार के चलते नहरों के विकास कार्य को आये करोड़ो रुपयों का घोटाला सामने आया है । जनपद को 1.5 करोड़ रुपये नहरों की साफ़-सफाई व मरम्मत को शासन से मिला था पर एक दर्जन से भी ज्यादा नहरों में कोई कार्य नहीं हुआ और इसका खामियाजा किसानो को भुगतना पड़ता है । सूखे की मार झेल रहे किसानो के लिए भ्रस्ट अधियकारी यमराज से कम नहीं हैं । वही शिकायत पर लखनऊ से आई जाँच टीम द्वारा भी क्लीन चिट देदी गयी है, और तो और अधिकारियो ने तो शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने का भी दावा किया है । इतना ही नहीं हाल ही में बाँदा की नहरों का निरीछण कर सिचाई मंत्री ने नहरों की तारीफ करके सीएम साहब को टैग भी किया था, पर नहरों की वास्तविक हालत कुछ और ही है जो की अपनी जुबानी खुद ही बयान कर रहे हैं

सीएम योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट था की साल के आखरी तक नहरों की साफ़-सफाई व मरम्मत का कार्य पूर्ण हो जाए जिससे किसानो को नुकसान से बचाया जा सके, इसके लिए शासन ने डेढ़ करोड़ की धनराशि भी उपलब्ध कराई थी पर नहरों के लगने वाला पैसा अधिकारियो में भी बट गया और कागजी कार्यवाही में क्लीन चित व 100 प्रतिशत ओके दिखाया गया है । जनपद में एक दर्जन से भी ज्यादा नहरे ऐसी है जिनको अभी तक छुआ ही नहीं गया है । जनपद में घडी चांदपुर, जारर माइनर, रिसोरा, पहाड़पुर, तरखरी, खोई अजीतपुर, पतरह कोठी, जारी माइनर, आछाय माइनर, मूंगुस माइनर और सैमरी माइनर खुद ही अपना विकास बयान करती हैं । इन नहरों में पेड़ पौधे लगे है, नहरे टूटी पड़ी हैं, बरसात में पानी खेतो में घुसकर फसल बर्बादी करता है पर अधिकारियो के आँखों में शायद पट्टी बंधी है जिसे उनको कमिया दिखाई ही नहीं देती । इतना ही नहीं जब कोई शिकायत करता है तो लखनऊ से आई जाँच टीम भी सड़क किनारे की मरम्मत हुई 100 मीटर की नहर देखकर क्लीन चिट दे देते हैं । और तो और हमारे सिचाई मंत्री महोदय तो ऐसी कार में बैठे-2 ही नहरों को चमकता देखकर सीएम साहब को टैग कर देते हैं पर इन सब खानापूर्तियों का नतीजा किसानो को भुगतना पड़ता है ।

पहाड़पुर

पहाड़पुर माइनर और तारकरी माइनर । आप खुद देख सकते है की नहरों की हालत कैसी है और अब हम आपको सुनाते है इन क्षेत्रो के किसानो का गुस्सा । स्थानीय किसानो का कहना है की यह कई वर्षो से साफ़-सफाई है, हम सभी किसान परेशान हैं, बरसात में हजारो बीगा पानी आता है जो की खेतों में घुस जाता है, काम से काम अगर यहाँ साफ़-सफाई या मरम्मत नहीं होती तो 10 इंची पाइप ही दाल जाता तो हमे दिक्कत नहीं होती । किसानो का कहना है की यहाँ अधिकारी कभी कबार आते हैं और खानापूर्तिओ करके चले जाते हैं ।

खोई अजीतपुर

तेरहा माइनर, कड़ीपुर नहर और जानपुर माइनर और किसानो व स्थानीय लोगो से बात करते हैं । यहाँ के लोगो का कहना है की नहरे हमेसा से ही सूखी पड़ी है, कभी भी मरम्मत नहीं हुई है, अधिकारी कभी कबार आते हैं, बैठे-२ जाँच हो जाती है, जहां से नहर कमजोर है वहाँ से पानी आता है और हमारी फसलों को नष्ट करता है, किसानो ने बताया की डेढ़ साल पहले नहर में मिटटी की थोड़ी बहुत खुदाई हुई थी, नहरे भ्रस्टाचार बकी भेट चढ़ चुकी हैं । किसानो का कहना है की नहर में कोई काम नहीं होता है हर तरफ कटान पड़ी है, नहरों के दोनों किनारों में मरम्मत कर दी जाती है जिससे अधिकारी आते है और किनारे का निरीछण करके क्लीन चिट देते हैं ।

जेई की जुबानी

 जहाँ उनके हिसाब से सब कुछ ठीक है । जेई गरुण देव का कहना है की बाँदा से निकलने वाले माइनरों में काम कराया गया है, शासन की जाँच लखनऊ से आई थी, अभी रिपोर्ट नहीं सौपी गयी है जल्द ही सौपी जाएगी, हो सकता है पर काम कराने के बाद भी नहरों में कमी आ गयी हो, उनकी जल्द मरम्मत कराई जाएगी । वही जल संसथान के अधिशाषी अभियंता अरविंद पाण्डेय का बयान जहाँ उनको कोई कमी ही नहीं नजर आ रही है, की नवम्बर में टेंडर हुए थे, नया सञ्चालन 10 से 23 जनवरी तक होना है, जिन नहरों में कमियों की शिकायत आ रही है उनकी मरम्मत कराई जा रही है । डेढ़ करोड़ का बजट शासन ने भेजा था उसमे कार्य चल रहा है तथा तीन तरह की जाँच होती है जिसको सौंपा जायेगा ।

वहीं जब नहरों की दुर्दशा, भ्रस्टाचार और करोड़ो के घोटाले की जानकारी के लिए जब बाँदा के मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार करते हुए अपना पल्ला झाड़ते हुए जाँच का हवाला दे दिया

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