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आपातकाल में प्रेस की आज़ादी का क्या हुआ था ? आप सब जानते हैं -निर्मला सीतारमण

कांग्रेस और 'टुकड़े-टुकड़े वाली अतिवादी वामपंथी पार्टियाँ' आज अभिव्यक्ति और प्रेस की आज़ादी को लेकर बयान देती हैं। आप सब जानते हैं कि आपातकाल में प्रेस की आज़ादी का क्या हुआ था। आप सब जानते हैं कि कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में एक पत्रकार को कैसे पीटा गया।

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने आज पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में अख़बार नवीशों से रू ब रू होते हुए फ़रमाया कि  कांग्रेस शासित पंजाब में बिहार निवासी दलित मजदूर एक छः वर्षीय दलित बच्ची से हुए बलात्कार एवं नृशंस हत्या को लेकर अमरिंदर सरकार और राहुल गाँधी एवं प्रियंका वाड्रा पर जम कर हमला बोला। जिस तरह कांग्रेस नेता राहुल गाँधी एवं प्रियंका वाड्रा ने हाथरस मामले में सक्रियता दिखाई, वैसी सक्रियता होशियारपुर, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे कांग्रेस शासित राज्यों में हुए बलात्कार मामलों को लेकर क्यों नहीं दिखाई? जब हाथरस में ऐसी वारदात होती है तो राहुल गांधी वहां राजनीतिक करने चले जाते हैं, लेकिन जब उनकी सरकार वाले राज्य में ऐसी घटना होती है तो वह चुप्पी साधे रहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं आज कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहती कि क्या जहां आपकी सरकार नहीं है वहां अगर बलात्कार जैसी शर्मनाक घटना होती है हैतो उसके खिलाफ आप भाई-बहन गाड़ी में बैठकर पिकनिक की तरह प्रदर्शन करने जाएंगे, मगर होशियापुर क्योंकि वहां कांग्रेस की सरकार है तो आप उस पर एक भी शब्द नहीं बोलेंगे क्या? हर मुद्दे पर ट्वीट करने वाले राहुल गांधी जी ने होशियारपुर में बच्ची से हैवानियत पर एक भी ट्वीट नहीं कियाजबकि इस घटना को तीन दिन हो गए। यह कैसी दर्दनाक और शर्मसार करने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि बहानेबाज कांग्रेस इस बर्बरता परख़ामोश है। ‘ट्विटर फ़्रेंडली’ राहुल गाँधी ने इस बारे में न कोई ट्वीट किया है और न ही वो किसी ‘पिकनिक’ पर गए हैं।

कांग्रेस शासित प्रदेशों में मीडिया पर हो रहे लगातार हमले को लेकर एक प्रश्न के जवाब में श्रीमती सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस और ‘टुकड़े-टुकड़ेवाली अतिवादी वामपंथी पार्टियाँ’ आज अभिव्यक्ति और प्रेस की आज़ादी को लेकर बयान देती हैं। आप सब जानते हैं कि आपातकाल में प्रेसकी आज़ादी का क्या हुआ था। आप सब जानते हैं कि कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में एक पत्रकार को कैसे पीटा गया। आज महाराष्ट्र में भी यही होरहा है। ये लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात तो करते हैं लेकिन इसके लिए आवाज उठाने वाली मीडिया का ही गला दबाने का प्रयास करतेहैं। भाई-बहन की जोड़ी जरा सोच लें। किस हद तक उनकी सरकार अभिव्यक्ति को दबा रही है। उनके लोग लिखते हैं फ़्रीडम ऑफ स्पीच खतरेमें है। खतरे में कहां है, वहां है – जहां कांग्रेस की सरकारें हैं।

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