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पहले राशन हो, गैस सब्सिडी हो, पेंशन हो या स्कॉलरशिप, हर जगह घोटाला चलता था-वज़ीरे आज़म

वज़ीरे आज़म  नरेन्द्र मोदी ने बिहार के डेहरी (सासाराम), गाँधी मैदान, गया और हवाई अड्डा मैदान, भागलपुर में आयोजित विशाल जन-सभाओं को संबोधित किया और कहा कि बिहार ने चुनाव से काफी पहले ही एनडीए सरकार बनाने का निर्णय ले लिया है। सासाराम में मंच पर  प्रधानमंत्री जी के साथ बिहार के मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार, बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल, विकासशील इंसान पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी और सासाराम से सांसद  छेदी पासवान भी उपस्थित थे। सासाराम की रैली से भाजपा के 12, जदयू के 12 और वीआईपी के 1 उम्मीदवार एनडीए कार्यकर्ताओं के साथ अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र से प्रधानमंत्री जी की रैली से वर्चुअली जुड़े।

सर्वप्रथम केंद्र सरकार में मंत्री एवं गरीबों-दलितों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले  राम विलास पासवान जी और गरीबों के उत्थान के लिए काम करने वाले श्री रघुवंश प्रसाद सिंह जी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कोरोना जैसी बड़ी आपदा का डटकर मुकाबला करने और लोकतंत्र का पर्व मनाने के लिए बिहार की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा की मैं बिहार की जनता को दो बातों के लिए बधाई देना चाहता हूं। पहली बधाई इस बात के लिए, कि बिहार के लोग इतनी बड़ी आपदा का डटकर मुकाबला कर रहे हैं और दूसरी बधाई इसलिए क्योंकि चुनाव से इतने दिन पहले ही आप लोगों ने ने अपना स्पष्ट संदेश सुना दिया है। उन्होंने कहा कि एक बात जो बिहार के लोगों में बहुत अच्छी होती है, वो है उनकी स्पष्टता। वो कन्फ्यूजन में नहीं रहते, किसी भ्रम में नहीं रहते। एनडीए का संकल्प है- बिहार को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना। बिहार के लोग ये ठान चुके हैं कि एनडीए को फिर जिताना जरूरी है। अगर बिहार में विरोध और अवरोध को ज़रा भी मौका मिला तो बिहार की गति और प्रगति दोनों धीमी पड़ जाएगी। इसलिए, नीतीश जी की अगुवाई में भाजपा, जेडीयू, हम और VIP के गठबंधन यानि NDA को एक-एक वोट पड़ना चाहिए।

लोग उन दिनों को भूल नहीं सकते जब सूरज ढलते का मतलब होता था, सब कुछ बंद हो जाना,। आज बिजली है, सड़के हैं, लाइटें हैं और सबसे बड़ी बात वो माहौल है जिसमें राज्य का सामान्य नागरिक बिना डरे रह सकता है, जी सकता है। आज के बिहार में लालटेन की जरूरत खत्म हो गई है। आज बिहार के हर गरीब के घर में बिजली का कनेक्शन है, उजाला है। ये वो दौर था जब लोग कोई गाड़ी नहीं खरीदते थे, ताकि एक राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं को उनकी कमाई का पता न चल जाए। ये वो दौर था जब एक शहर से दूसरे शहर में जाते वक्त ये पक्का नहीं रहता था कि उसी शहर पहुंचेंगे या बीच में किडनैप हो जाएंगे। आज आप एक नए बिहार को बनते देख रहे हैं। बिहार में नई व्यवस्थाओं को बनते देख रहे हैं। आज बिहार में पीढ़ी भले बदल गई हो लेकिन बिहार के नौजवानों को ये याद रखना है कि बिहार को इतनी मुश्किलों में डालने वाले कौन थे। जिन लोगों ने एक-एक सरकारी नौकरी को हमेशा लाखों-करोड़ों रुपए कमाने का जरिया माना, जिन लोगों ने सरकारी नियुक्तियों के लिए बिहार के नौजवानों से लाखों की रिश्वत खाई, वो फिर बढ़ते हुए बिहार को ललचाई नजरों से देख रहे हैं। वो दिन जब सरकार चलाने वालों की निगरानी में दिन-दहाड़े डकैती होती थी, हत्याएं होती थीं, रंगदारी वसूली जाती थी, वो दिन जब घर की बिटिया, घर से निकलती थी, तो जब तक वापस न आ जाए माता-पिता की सांस अटकी रहती थी। आज बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, IIT, IIM जैसे संस्थान खोले जा रहे हैं। यहां बोधगया में भी तो IIM खुला है जिस पर करीब-करीब एक हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। वरना बिहार ने वो समय भी देखा है, जब यहां के बच्चे छोटे-छोटे स्कूलों के लिए तरस जाते थे।

 भारत के ज्ञान, आस्था और आध्यात्म का केंद्र रहा है। ये कितनी बड़ी बिडंबना है कि जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ, उस धरती को नक्सली हिंसा और जघन्य हत्याकांडों में झोंक दिया गया। बीते वर्षों में बिहार के इस हिस्से को नक्सलियों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। अब नक्सलवाद को देश के एक छोटे से हिस्से में समेट दिया गया है। महागठबंधन पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि NDA के विरोध में इन लोगों ने मिलकर जो ‘पिटारा’ बनाया है, जिसे ये लोग महागठबंधन कहते हैं, उसकी रग-रग से बिहार के लोग वाकिफ हैं। वो लोग जो नक्सलियों को, हिंसक गतिविधियों को खुली छूट देते रहे, आज वो NDA के विरोध में खड़े हैं। देश को तोड़ने की, देश को बांटने की वकालत करने वालों पर जब एक्शन लिया जाता है, तो ये लोग उनके साथ खड़े हो जाते हैं। इन लोगों का मॉडल रहा है बिहार को बीमार और लाचार बनाना।

कोरोना के इस समय में भी गरीबों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एनडीए सरकार ने काम किया है। जहां कभी गरीब का राशन, राशन की दुकान में ही लुट जाता था, वहां कोरोना काल में गरीबों को मुफ्त राशन मिला है। शहरों में जो रेहड़ी, ठेला, चलाने वाले साथी हैं, उनके लिए भी बैंकों से आसान ऋण सुनिश्चित कराया जा रहा है ताकि वो अपना काम फिर शुरु कर सकें। गरीब भूखा ना सोए, त्योहार ठीक से मना सके, दीवाली और छठ पूजा ठीक से मना सके, इसके लिए मुफ्त अनाज की व्यवस्था की गई है। इसी कोरोना के दौरान करोड़ों गरीब बहनों के खाते में सीधी मदद भेजी गई, मुफ्त गैस सिलेंडर की व्यवस्था की गई। महागठबंधन के लोगों को आपकी जरूरतों से कभी सरोकार नहीं रहा। ये सिर्फ सत्तासुख के हैं, आपकी, जनता की सेवा से, आपकी जरूरतों से इनका कोई सरोकार नहीं है। इनका ध्यान रहा है अपने स्वार्थों पर, अपनी तिजौरी पर। यही कारण है कि भोजपुर सहित पूरे बिहार में लंबे समय तक बिजली, सड़क, पानी जैसी मूल सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया। हालत ये थी कि कैमूर में जिस दुर्गावती सिंचाई परियोजना का शिलान्यास बाबू जगजीवन राम जी ने 70 के दशक में किया था, वो इतने वर्षों में भी पूरी नहीं हुई थी। इस काम को NDA सरकार ही पूरा कर रही है। बिहार के विकास की हर योजना को अटकाने और लटकाने वाले ये वो लोग हैं जिन्होंने अपने 15 साल के शासन में लगातार बिहार को लूटा, बिहार का मान-मर्दन किया। आपने बहुत विश्वास के साथ इन्हें सत्ता सौंपी थी, लेकिन इन्होंने सत्ता को अपनी तिजोरी भरने का माध्यम बना लिया। बाद में 18 महीने क्या हुआ, ये आप भली-भांति जानते हैं। इन 18 महीनों में परिवार ने क्या-क्या किया, कैसे-कैसे खेल किए, ये भी किसी से छिपा नहीं है। जब नीतीश जी इस खेल को भांप गए, ये समझ गए कि इन लोगों के साथ रहते हुए बिहार का भला तो छोड़िए, बिहार और 15 साल पीछे चला जाएगा तो उन्हें फैसला लेना पड़ा।

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