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कुत्ता घुमाने वाले अफ़सरों का तबादला लद्दाख और अरुणाचल में करना कितना सही कितना ग़लत ?

नई दिल्ली : हाल ही में त्यागराज स्टेडियम में कुत्ता घुमाने वाले आइएस दंपत्तियों का तबादला केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश एवं लद्दाख में किया है जानकारों का ऐसा मत है कि इस तरह की पोस्टिंग बाबुओं को सजा के तौर पर दी जाती है, पर और आज के दौर में अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में चीन जिस तरह की हरकतें कर रहा है उन हलातों के मद्दे नज़र कहाँ तक इन दोनों अधिकारियों का तबादला ऐसी जगह करना क्या ठीक होगा ?
IAS एक पुरानी अंग्रेजों के दौर की परम्परा है जहाँ बहुत काबिल अफ़सर हमें देखने को मिलते हैं वहीं दूसरी तरफ़ कुछ दूसरे तरह की अफ़सरों के कारनामे अक्सर पब्लिक डोमेन में देखे जा सकते हैं ।
Newsip ने पहले भी इस बात को मज़बूती से रखा है कि किस तरह कुछ सरकारी बाबू अपनी पूरी ज़िंदगी ऐस ओ आराम से काटना चाहते हैं , हाल ही में BPCL की नीलामी ना होना और वजह ये बताना कि सरकार को ऊँची बोली लगाने वाली कम्पनी नहीं मिली ? क्या इस बात का इल्म इस योजना को बनाने वाले बाबुओं को नहीं था ? ज़रा गौर करें कितना पैसा इस दौरान खर्च हुआ होगा ? इस पैसे को कहाँ से रिकवर किया जाएगा ? हमने भारत में सरकारें को बदलते देखा है पर सरकारी सलाहकार (बाबू) घुमा फिरा कर वही रहते हैं , प्रधानमंत्री का आँकलन बिलकुल सही था ” सिर्फ़ सरकारी बाबू ही नहीं देश के दूसरे काबिल व्यक्तियों में भी सलाहियत होती है उनको सिर्फ़ एक मौक़ा देने की ज़रूरत है ”
सवाल ये उठने लगे हैं कि अगर लद्दाख या अरुणाचल प्रदेश में भी इन अधिकारियों की कुत्ता घुमाने वाली आदत सताने लगी तो फिर सरहद से लगे इस इलाक़े की प्रशासनिक व्यवस्था कैसे चलेगी ?

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