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गीता व वेद ज्ञान सारे संसार को एकता और भाईचारे के सूत्र में बाँधने का काम करते है-राज्यपाल-हरियाणा

चण्डीगढ़ : हरियाणा के राज्यपाल बण्डारू दत्तात्रेय ने कहा कि गीता व वेद को मनुष्य जीवन जीने की कला सिखाने वाली और इसे सुख-दुख, हानि-लाभ, हार-जीत आदि में संतुलित रहकर कर्म करने का संदेश देते हैं। यह बात उन्होंने पानीपत के वेद विद्यालय व बांके बिहारी ज्ञानेश्वर मंदिर के लोकार्पण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कही। उन्होंने कहा कि गीता व वेदों का नाम सुनते ही हमारे मस्तिष्क में धर्मग्रन्थों का रूप उभरकर सामने आता है। इनको पढकर पाठक इस नतीजे पर पहुँचता है कि ये ग्रन्थ मानवमात्र के लिये प्रेरणादायक हैं। जिस प्रकार गीता मनुष्य को जीने की कला सिखाती है और मनुष्य को दुरूख-सुख, हानि-लाभ, हार-जीत आदि में सन्तुलित रहकर कर्म करने का महान् सन्देश देती है। उसी प्रकार वेद मनुष्य को सुखपूर्वक जीने की राह बताते हैं। वेदों में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रशासनिक व्यवस्था व परस्पर सम्बन्ध आदि विषयों का ज्ञान भरा हुआ है।  गीता की शुरुआत ‘धर्म’ शब्द से होती है-धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव। यहां धर्म शब्द किसी सम्प्रदाय या त्मसपहपवद का वाचक नहीं है, इसी प्रकार वेदमंत्र की शुरूआत ऊँ भूर्भवरू तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नरू प्रचोदयात् से शुरू होती है। इस मंत्र का संबंध भी किसी मजहब विशेष से न होकर व्यक्ति को बुरे कर्मों के प्रयोग से छुटकारा दिलवाने के लिए जागरूक करता है। इस प्रकार गीता व वेदों को ध्यान से पढ़ा जाए तो शुरु से लेकर अन्त तक सम्पूर्ण ग्रन्थों का यही सार निकलता है कि मनुष्य को अपना कत्र्तव्य सही ढंग से निभाना चाहिए, न्यायपूर्ण कर्म करना चाहिए और सामाजिक व्यवस्थाओं का पालन कर बुरे कार्यों से दूर रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गीता व वेद ज्ञान सारे संसार को एकता और भाईचारे के सूत्र में बाँधने का काम करते है। पवित्र ग्रन्थ, श्रीमद्भगवद गीता व वेदों की महत्ता के विषय में जितना भी कहा जाए कम है। आज भारत की पहचान विश्व में श्रीमद्भगवद गीता, योग, आर्युवेद, वेदान्त, संगीत, शिल्प व अनगिनत आध्यात्मिक विधाओं से है। भारत की भूमि अनगिनत आध्यात्मिक रत्नों की खान है। इसी धरोहर को सहेजने के लिए व आगे बढ़ाने के लिए हमारी धार्मिक संस्थाएं पूरे सामर्थय के साथ कार्य कर रही हैं। आज समाज में नशा, अपराध, दुरूचार को रोकने के लिए सरकार अपने स्तर पर कानून के माध्यम से कार्य कर रहीं है । सरकार के साथ-साथ समाजिक संस्थाओं का भी दायित्व है कि वे वर्तमान पीढ़ी को नैतिक शिक्षा देकर समाज में समरस्ता बढ़ाए। हम सभी को भी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए और अधिक जज्बे के साथ कार्य करना होगा। हर व्यक्ति को गीता व वेदों के प्रचार के लिए काम करना होगा नहीं तो भारतीय संस्कृति पर अन्यों संस्कृतियों का प्रभाव बढ़ जाएगा। इसके लिए हमें सांस्कृतिक समरस्ता का निर्माण कर वेदमन्त्रों की गूंज को और तेज करना है। वर्तमान शिक्षा की व्यवस्था में आज संवैधानिक व नैतिक मूल्यों का भीे समावेश करना नितांत आवश्यक है। इससे देश की युवा पीढ़ी समृद्ध संस्कार ग्रहण कर देश को फिर से विश्व गुरू बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने श्री कृष्ण वेद विद्यालय व श्री बाके बिहारी ज्ञानेश्वर मन्दिर के लोकापर्ण कार्यक्रम अंसल सिटी में शामिल होते हुए अपने सम्बोधन में कहा कि हमारे देश की पहचान हमारे संत है क्योंकि भारत देश एक अत्याधमिक देश है। आज सौभाग्य का दिन है कि पानीपत की ऐतिहासिक भूमि पर वेद विद्यालय व मन्दिर का लोकापर्ण हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानीपत नगरी वेद ज्ञान के अन्दर भी अपनी ऐतिहासिक रूप से पहचान बनाएगी। आज वेदों को समाज के अंतिम छोर तक पंहुचाने के लिए हमारे देश के संतों द्वारा कार्य तेजी से किया जा रहा है। वेदों के माध्यम से ही पिछले सात वर्षो में हमारे देश के जनमानस में बहुत परिवर्तन हुआ है। इसी प्रकार गीता का भी प्रचार-प्रसार बड़ी तेजी से पिछले कुछ वर्षो से हो रहा है क्योंकि गीता व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन करने का कार्य करती है। उन्होंने पानीपत के वेद विद्यालय के लोकापर्ण की शुरूआत के साथ कहा कि यह विद्यालय एक नई शिक्षा देने का कार्य यहां के विद्यार्थियों के लिए करेगा क्योंकि वेद किसी के बनाए हुए शब्द नही है। यह हमारी संस्कृति की शुरूआत से ही हमे अच्छा जीवन जीने का तरीका सिखाते हुए आ रहे हैं। आज के युग में हमारे देश के संतों द्वारा आज के नौजवानों में वेदों का निर्माण हो इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। एक लम्बे प्राचीन काल खण्ड तक हमारी संस्कृति को नष्ट करने के लिए मुगलों से लेकर अंग्रेजों द्वारा कार्य किया गया लेकिन हमारे देश के ऋषि मुनियों, संतों की तपस्या के कारण वे अपने कार्य में सफल नही हो पाए। उन्होंने पानीपत की जनता को बधाई देते हुए कहा कि आप सब बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं क्योंकि आपके बीच में वेदों की एक नई दिशा का निर्माण हुआ है। उन्होंने ऋग वेद, साम वेद, यजुर्वेद और अथर्वेद के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि नौजवान पीढ़ी में संस्कारी व्यक्तित्व की भावना भरने के लिए इन वेदों के निचोड़ को पाना बहुत जरूरी है जिससे गोविन्द गिरी महाराज आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने संत ज्ञानेश्वर महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरक बताया। उन्होंने कहा कि देश के हर जिले में जिस तरह से वेद विद्यालय खोलने का लक्ष्य लेकर संत गोविन्द गिरी काम कर रहे हैं उससे निश्चित तौर पर ज्ञान का प्रकाश फैलेगा।
इस अवसर पर प्रसिद्ध योग गुरू रामदेव जी महाराज ने कहा कि पानीपत की लड़ाई के साथ-साथ पानीपत की वेद पढाई भी पूरी दुनिया में पढ़ी जानी चाहिए। इसी मूल मंत्र के साथ यहां वेद विद्यालय की स्थापना हुई है। जीवन की सारी  विद्याएं वेदों में ही समाहित हैं। गीता मनीषी ज्ञानानन्द महाराज ने कहा कि भारत विश्व गुरू बनने की ओर अग्रसर है और यहां का सूर्य पूरे विश्व में रोशनी फैला रहा है।

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