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गैस सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स के अलार्म पर नहीं दिया ध्यान अब मंत्रालय ने जारी किया गैस के दामों को बड़ाने का फ़रमान

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नई दिल्ली : हमने अपने रीडर्स को यूक्रेन वार शुरू होने से पहले अपने आंकलित किए हुए समाचार के द्वारा या बताया था कि किस तरह आने वाले दिनों में गैस के दाम आसमान छूने लगेंगे और महंगाई का असर सर चड कर बोलेगा , हमारे पूर्व में दिये गये समाचार आज सही साबित हो रहे हैं पेट्रोलियम योजना एंड विश्लेषण प्रकोष्ठ ने 1 अक्तूबर 2022 से  मार्च 2023 तक के डोमेस्टिक गैस की दरों का एलान कर दिया है।

सवाल बहुत साफ़ है “क्या जब भी कोई क्राइसिस आये तो दामों में इज़ाफ़ा करके उसे कंट्रोल कर लिया जाये ?” ये तो कोई नीति नहीं होती. ये तो सीधा सीधा गणित है, फिर प्राइस ऊपर कर दो घाटा कम हो जाएगा, आख़िर कब तक चलता रहेगा ये ? पब्लिक सेक्टर अंडर टेकिंग कंपनियाँ  क्या हर सरकार के लिए दूध देने वाली गाय बना दी गईं हैं जब चाहें दूध निकाल लो और बोल दो दूध बछड़ा पी गया, आख़िर दोष किसका है ? सियासी लीडरों का काम है सियासत करना और हुकूमत करना जो अक्सर बदलते रहते हैं कभी किसी के पास कोई मंत्रालय आ जाता है तो कभी किसी के पास कोई मंत्रालय आ जाता है पर अफ़सर बड़े बाबू उनको बहुत ही कम बदलते देखा है ?

सरकार चाहें किसी भी दल की हो या मंत्रालय किसी के भी पास हो पर सलाह तो इन्ही बाबुओं से ली जाती है अक्सर सरकार बदलने पर ये इल्ज़ाम लगाया जाता है कि ये तो नीति हमारी सरकार ने बनाई थी, ये योजना तो हमारी सरकार ने बनाई थी जिसे आज नई सरकार लागू कर रही है, बिलकुल सही है क्योंकि सरकार बदली है साहब नये नेता आये  हैं सरकार पर क़ाबिज़ होने पर सलाहकार नहीं बदले । सलाहकार तो उस सरकार में भी यही होते है और नई सरकार में भी तक़रीबन यही ?

और माफ़ कीजिए हमारे कई एक्सपर्टस की राय है कि PSUs वाले अधिकारियों की मजबूरी होती है सरकार या मंत्रालय की बीन पर तन डोले मन डोले करना क्योंकि अक्सर PSUs के बड़े अधिकारीगण को चुन्ने का पैरामीटर ही ज़ी हुज़ूरी होता है ? जब गैस के दामों पर हम चेता रहे थे तब गैस की कंपनियाँ डांस गाने के प्रोग्रामों में सराबोर हो रही थीं जिस तरह सोशल मीडिया पर चल चित्र चल रहे थे उससे तो ऐसा महसूस हो रहा था  कि मानो ये कंपनियाँ कह रही हों कि चाहें पूरी दुनियाँ में रुस और अमेरिका की दादागिरी से परेशान मुल्क और उनकी कंपनियों की R&D टीम इस बात पर गौरो फ़िक्र कर रही थी की कैसे हम अपने नागरिकों  को आने वाली इस चुनौती से बाहर निकालें? पर हमारी गैस कंपनियों और PSUS के इंटरनेशनल ट्रेड , कॉर्पोरेट /स्ट्रेटेजिक प्लानिंग सेलस की टीम मानो ये मेसेज दे रही हो कि भैया चिंता की कोंहू बात नहीं “IN INDIA ALL IS WELL ” डांस के मज़ा लो कंपनियों के नाम पर सूट पेंट टाई बूट और साफ़ा शेरवानी सिलवाओ रिबन काटो और मस्त हो जाओ, और बहुत ज्यादा हो तो इवेंट के नाम पर एक इंटरनेशन ट्रिप प्लान कर लो चाहें उस मुल्क में आपके बनाये हुए ब्रांड कि बिक्री ज़ीरो हो पर ब्रांडिंग तो ब्रांडिंग है बजट है तो खर्च भी करेंगे और अकेले क्यों खर्च करें माननिय को भी मिला लेते हैं फिर जब साहब कोतुहाल तब डर काहे का ?  अब वो कनपनियाँ बतायें उस वक़्त उनको डांस करना चाहिएँ था, प्रोग्रामों में फ़ीते काटना चाहिएँ था या फिर आने वाले दिनों में गैस के प्राइस को कंट्रोल करने  के लिये गौरो फ़िक्र करना चाहिएँ थी ? क्या बेहतर था ? आख़िर में इस बात का ज़िक्र करना बहुत ज़रूरी है कि कितना अच्छा हो अगर हमारी PSUS कंपनियाँ परफॉरमेंस के दम पर पहचानी जाएँ ना की सोशल मीडिया के परफॉरमेंस से, सोशल के साथ मीडिया है तो जो मीडिया का काम है मीडिया को करने दें।

 

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