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दिल्ली के उप राज्यपाल ने नोटबंदी के समय नवंबर 2016 में पुराने नोट को नए में बदल कर घोटाला किया है

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नई दिल्ली,  दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना पर खादी ग्रामोद्योग के अध्यक्ष रहते हुए नोटबंदी के समय नवंबर 2016 में पुराने नोट को नए में बदल कर घोटाला किया है। मामले की जांच में हेड कैशियर प्रदीप यादव और संजय कुमार ने बयान दिए कि केवीआईसी के दो अधिकारी अजय गुप्ता और एके गर्ग ने डराया कि य ह पैसा चेयरमेन विनय सक्सेना का है। ये वो समय था जब गरीब लोग घंटों लाइन में लगकर अपने ढाई हजार रूपये बदलवा पा रहे थे। ऐसे समय में खादी जैसे संस्थान में अगर इस तरीके की गड़बड़ी हुई हैं तो इस पर बड़ी जांच होनी चाहिए। हमारी मांग है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। ऐसे अफसरों से जांच करानी चाहिए, जो किसी भी ऊंचे स्तर पर बैठे हुए व्यक्ति के दवाब में न आएं।

दिल्ली विधानसभा में हमारे साथी विधायक दुर्गेश पाठक ने एक बड़ी जानकारी सदन को दी। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना पहले खादी ग्रामोद्योग (केवीआईसी) के चेयरमेन थे।l जब 2016 में 8 नंबवर को प्रधानमंत्री ने देश में नोटबंदी का ऐलान किया। सभी जगहों पर 1 हजार व 500 रुपये के नोट के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई। उसी तरीके से केवीआईसी के अंदर भी एक सर्कुलर जारी किया गया कि अब आप किसी भी ग्राहक से पुराने नोट नहीं लेंगे। आप ग्राहकों से कार्ड के जरिए पैसा लेंगे या नई करेंसी से पैसा लेंगे। पहली बात ये है कि नोटबंदी के समय प्रधानमंत्री कार्यालय में इस तरीके की बहुत सारी शिकायतें गई कि केवीआईसी के अंदर बड़े पैमाने पर पुराने नोटों को नए नोटों में बदला जा रहा है। अब ये बात हम सभी समझते हैं कि अगर आपके पास वैध पैसा है तो पुराने नोट बदलने के लिए आपके पास बैंक का विकल्प होता है। आप बैंक में जाकर कह सकते हैं कि मेरे पास ये 5 लाख, 10 लाख, 20 लाख रुपए था। ये मैंने इस तरह से कमाया पैसा है और आप मेरा बैंक में कन्वर्ट कर लें। अगर व्हाइट मनी नहीं था तो फिर अलग-अलग तरीके से लोग इसे बदला रहे थे।

केवीआईसी में इस तरीके से पुराने नोटों को नए नोटों से बदला जा रहा है। इसे मामले को लेकर एक जांच निर्धारित हुई। जांच में पता किया गया कि बैंक के अंदर पुराने नोट किसने जमा कराए?  इस मामले में केवीआईसी के हेड कैशियर प्रदीप यादव और संजय कुमार के नाम सामने आए। जांच के दौरान दोनों के बयान लिखित में दर्ज हुए। दोनों कैशियर के बयान में समान बात सामने आई। उनके बयानों के मुताबिक केवीआईसी केजी मार्ग के फ्लोर इंचार्ज अजय गुप्ता और वहां केवीआईसी के मैनेजर एके गर्ग ने कैशियर्स को डराया-धमकाया। उन्होंने कहा कि ये पैसा उस वक्त के केवीआईसी के चेयरमैन का है। उस समय के चेयरमैन विनय सक्सेना जी थे, जो वर्तमान में दिल्ली के उपराज्यपाल है। ऐसे में कुछ साधारण से सवाल इस मामले में पैदा होते हैं। एक कैशिय़र है, जिसने पैसा जमा कराया। जब वह छुट्टी पर गया तो उसकी जगह दूसरा कैशियर लेकर आए, फिर उसने पैसा जमा कराया। दोनों ही लोगों ने ये बात कही कि केवीआईसी के दो अधिकारी, अजय गुप्ता और एके गर्ग ने उन्हें डराया-धमकाया। साथ ही यह कहा कि ये पैसा उस वक्त के केवीआईसी के चेयरमैन का है।

ऐसे में इस मामले जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से होनी चाहिए। अगर चेयरमेन पर यह आरोप हैं तो चेयरमेन के अधीन रहने वालों से जांच कराने का कोई मतलब नहीं बनता। ये बड़ा मामला इसलिए बन जाता है क्योंकि ये वो समय था जब गरीब लोग घंटों लाइन में लगकर अपने ढाई हजार रुपये बदलवा पाते थे। उस दौरान लिमिट कभी 500 रुपये तो कभी 1 हजार तो कभी ढाई हजार हुआ करती थी। ऐसे समय में खादी जैसे, जिनके साथ गांधी जी का नाम जुड़ता है, ऐसे संस्थान में अगर इस तरीके की गड़बड़ी हुई हैं तो उसकी बड़ी जांच और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

सौरभ भारद्वाज ने बताया कि पहला बयान हेड कैशियर संजीव कुमार का है। यह बिक्री कक्ष में उनका कार्य बैंक में रकम जमा करना था। इनसे प्रश्न पूछा गया कि 500-1000 का पुराना नोट 08/11/16 के बाद स्वीकार किया या नहीं? पुराना नोट स्वीकार करना भारत सरकार के आदेश पर मना था। इसपर उन्होंने बताया कि मैंने 500-1000 का पुराना नोट भवन प्रबंधक के यह कहने पर स्वीकार किया कि अगर बैंक नोट ले रहा है तो जमा करना है यह चेयरमैन का आदेश है। मैंने प्रबंधक महोदय को मना किया फिर, प्रबंधक महोदय ने मुझे कहा कि ऊपर से चेयरमैन का दबाव है। अगर यह नहीं किया तो चेयरमैन नाराज़ हो जाएंगे। अतः इस बात से मैं काफ़ी डर गया था। क्योंकि नोटबंदी से 5 दिन पहले चेयरमैन ने भवन के दो स्टाफ का ट्रान्सफर गोवा और जयपुर कर दिया था। अतः मैंने मज़बूरी में यह काम किया जिसकी जानकारी भवन के अधिकतर स्टाफ को पहले से है। इस कार्य के लिए प्रतिदिन प्रबंधक बिक्री कक्ष में अजय गुप्ता से मुझे भवन प्रबंधक कक्ष में बुलाते तथा पुराने 500-10000 के नोट बदलने के लिए देते। तब कहते कि आप प्रतिदिन अजय गुप्ता को नोट बदल कर दिया करो। मैंने जो भी अनुचित कार्य किया वह प्रबंधक एके गर्ग के दबाव में किया, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एके गर्ग की है। मैं यह बात शपथ पूर्वक कह रहा हूं। इस कार्य में मेरा दोष नहीं है। मैं बड़े दुखी मन से बैंक में कैश जमा कराने जाता था। मेरे करीब 7 दिन के अवकाश पर जाने के बाद एलडीसी प्रदीप यादव, मेरी अनुपस्तिथि में हेड कैशियर का कार्य करता है। सही बात यह है कि मैं अपने तबादले से डर कर यह कार्य किया क्योंकि कुछ दिन साल पहले भवन के एक स्टाफ की मृत्यु दिल्ली के बाहर भेजने पर हो गई थी। मेरा इसमें कोई दोष नहीं है। पूरा दोष भवन प्रबंधक तथा अजय गुप्ता का है।

जब ये अवकाश पर गए तो इनकी जगह पर प्रदीप कुमार यादव आए। उन्होंने भी ये बात कही। उनसे सवाल पूछा गया कि संजीव कुमार मलिक के अवकाश पर जाने पर आपने कैशियर का कार्य किया या नहीं? उन्होंने कहा हां कार्य किया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी 9-11-16 के बाद हमने ग्राहक से पुराने नोट स्वीकार नहीं किए, जो भी नोट जमा हुए हैं वो काउंटर कैशियर के द्वारा जमा किए गए। नए नोट हेड कैशियर के पास जाते थे। इसके बाद वह नोट एके गर्ग साहब के आदेश अनुसार अजय कुमार गुप्ता के द्वारा हेड कैश केबिन में बदले जाते थे। इसके बाद उन नोट को कैशियर बैंक में जमा करते थे। श्री मान प्रबंधक श्री एके गर्ग ने हेड कैश पर काम करने के एक दिन पहले शाम को अपने केबिन में बुला कर हमें नोट बदलने के लिए कहा था। हमने कहा सर कोई परेशानी ना हो, तो उन्होंने कहा कि यह चेयरमैन का है, चिंता की बात नहीं है। हम हैं कोई बात नही। यह कार्य कैशियर को प्रेशर देकर कराया गया। गर्ग ने कहा पहले से भी जमा हो रहा है, चिंता का कोई कारण नहीं है। अजय कुमार गुप्ता जाएंगे जैसा कहें वैसा कर लेना। इसके बाद भी अजय गुप्ता पुराने नोट लेकर आते थे और नए नोट ले जाते थे। हेड कैशियर पुराने नोट को बैंक में जमा कर देते थे। यह कार्य धमकी के साथ (जैसा कह रहा हूँ वैसा करो) कहा जाता था।

 केवीआईसी के हैड कैशियर की छुट्टी पर जाने के बाद जो दूसरे आए, उनका बयान बिल्कुल एक समान है। दोनों ने ही यह कहा है कि अजय कुमार गुप्ता और एके गर्ग ने दबाव बनाया। उन्हें साफ लफ्जों में कहा गया था कि ये चैयरमैन का है और चैयरमेन का आदेश है। इस आदेश के चलते उन्होंने यह किया। हमारी ये मांग है कि इस मामले की इंडिपेंडेंट जांच होनी चाहिए। ऐसे अफसरों से जांच करानी चाहिए जो किसी भी ऊंचे स्तर पर बैठे हुए चेयरेमेन के दबाव में न आएं।

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