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मोदी सरकार सिर्फ अपने कुछ चुनिंदा अमीर दोस्तों के लिए सत्ता में आई है-कांग्रेस

2 लाख करोड़ के घोटाले में देश के बेशकीमती प्राकृतिक संसाधनों की खुली लुट हुई है इसकी नैतिक जिम्मेदारी नरेन्द्र मोदी जी किस पर टालेंगें। हम इन तमाम प्रश्नों के उत्तर सरकार से पूछते हैं।

नई दिल्ली :  केन्द्र में बैठी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पिछले 6 सालों में बार-बार ऐसे उदाहरण दिए हैं, जिससे ये स्पष्ट हो जाता है कि मोदी सरकार सिर्फ अपने कुछ चुनिंदा अमीर दोस्तों के लिए सत्ता में आई है और सिर्फ उसी के लिए वो सत्ता में रहना चाहती है। हवाई अड्डों से लेकर  बंदरगाहों तक, टेलीकोम से जो हमारी नवरत्ना कंपनी हैं उन तक और यहाँ तक कि भारत का गौरव माने जाने वाली भारतीय रेल तक मोदी सरकार अपने दोस्तों पर लुटाने के लिए सदैव तत्पर दिखाई देती है, ever ready. यह सरकार भूल जाती है कि देश और देश के भीतर इन तमाम संस्थानों का निर्माण सिर्फ कुछ पूंजीपतियों ने नहीं किया है, इस देश को एक-एक ईंट जमा-जमा कर, सजा-सजा कर इसका निर्माण एक-एक भारतवासी की मेहनत, उसके खून और पसीने से हुआ है। जिस देश को हर देशवासी ने बनाया हो, उसे चंद अमीरों पर कोई लुटा रहा हो, चंद अमीरों के हाथ उसको कोई बेच रहा हो, ये देखकर बहुत ज्यादा दुख होता है, पीड़ा होती है, हमें भी होता है और आपको भी होता है।
खनन क्षेत्र में एक बहुत बड़े घोटाले की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने। 2014 से पहले लोह अयस्क, जो कच्चा लोहा होता है, जिसको अंग्रेजी में आयरन कहते हैं। उसका निर्यात सिर्फ एमएमटीसी (MMTC) कर सकती थी, सिर्फ एमएमपीसी को ही उसकी अनुमति थी और एमएमटीसी भी सिर्फ वो लोहा अयस्क निर्यात कर सकती थी, जिसमें 64 प्रतिशत लोहे का संकेन्द्रण या कंसंट्रेशन होता है। 64 प्रतिशत FE आपने और हमने जो बचपन में केमेस्ट्री और सब पढ़ा था, उसमे थोड़ा सा याद दिला दूं, तो जो कॉस्ट्रेशन जिसमें 64 प्रतिशत FE का होता है, सिर्फ उसको एमएमटीसी निर्यात कर सकती थी और एमएमटीसी में 89 प्रतिशत सरकार की हिस्सेदारी है, ये एक सरकारी कंपनी है। लौह अयस्क के निर्यात पर 30 प्रतिशत निर्यात शुल्क भी लगता था। यह इसलिए किया जाता था ताकि उम्दा स्तर का लोहा देश में ही रहे और देश के स्टील प्लांट के उपयोग में आए।
2014 में जब मोदी सरकार आई तो यह तमाम नियम कानून आनन फानन में बदल दिए गए। स्टील मंत्रालय ने सबसे पहले तो 64 प्रतिशत लौह संकेन्द्रण का नियम बदला और Kudremukh Iron Ore  Company Limited (KIOCL) को चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और जापान में लौह अयस्क निर्यात की अनुमति दी। इसके अलावा मंत्रालय ने नीति में एक और परिवर्तन करते हुए यह घोषणा की कि लौह अयस्क पर तो 30 प्रतिशत निर्यात शुल्क जारी रहेगे लेकिन अगर यह लौह अयस्क छर्रों के रूप में निर्यात किया जाए तो उस पर कोई निर्यात शुल्क लागू नहीं होगा। निर्यात करने की अनुमति KIOCL को प्राप्त थी लेकिन 2014 से अब तक कई निजी कंपनियों ने छर्रों के माध्यम से हिन्दूस्तान का लौह अयस्क निर्यात करना शुरू कर दिया। इस पर शुल्क के रूप में हजारों करोड़ रूपये की चोरी हुई ।
अनुमान यह है कि इन निजी कंपनियों ने 2014 से अब तक लगभग 40 हजार करोड़ रूपये का लौह अयस्क निर्यात किया है। स्मरण रहे इन कंपनियों के पास लौह अयस्क को निर्यात करने की अनुमति नहीं थी। निजी क्षेत्र की वह कंपनियों जिनके पास अपने उपयोग के लिए लौह अयस्क की खदानें थी, उन्होंने भी मौके का फायदा उठाते हुए स्टील मंत्रालय और केन्द्र सरकार की नाक के नीचे उम्दा लौह अयस्क का निर्यात छर्रो के माध्यम से किया।
ऐसा करने से न केवल भारत के बेशकीमती प्राकृतिक संसाधन को लुटाया गया बल्कि 12,000 करोड़ रूपये का निर्यात शुल्क भी चोरी किया गया। Foreign Trade (Development and Regulation) Act 1992 के तहत इन कंपनियों पर लौह अयस्क छर्रों के गैर कानूनी निर्यात पर 2 लाख करोड़ का जुर्माना बनता है।
10 सितंबर 2020 को कानून मंत्रालय ने पत्र (संलग्न) के माध्यम से यह स्पष्ट भी किया कि छर्रों के निर्यात की अनुमति KIOCL को है और उसके अलावा जितनी भी कंपनियों इस्तेमाल कर रहे हैं वह गैर कानूनी है। यह न केवल Foreign Trade (Development and Regulation) Act 1992 के तहत गैर कानूनी है बल्कि कस्टम एक्ट 1962 के तहत भी यह गंभीर अपराध माना जाता है।
हम केन्द्र सरकार से यह जानना चाहते हैं:
1. उच्च गुणवत्ता के लौह अयस्क, जिसमें 64 प्रतिशत से ज्यादा लोहे का संकेन्द्रण हो, के निर्यात की अनुमति क्यों दे दी गई ?
2. वह कौन सी कंपनियां हैं जिन्होंने 2014 से लेकर अब तक बिना अनुमति के लौह अयस्क का निर्यात किया ? उनके नाम सार्वजनिक किए जाए।
3. 2014 से लेकर अब तक क्या सरकार ने, क्या सरकार की किसी भी जांच एजेंसी ने लौह अयस्क के गैर कानूनी निर्यात को लेकर किसी भी निजी क्षेत्र की कंपनी की जांच की ?
4. केन्द्र सरकार ने अपने किसी मंत्री अथवा इससे संबंधित अधिकारी जिन्होंने यह गैर कानूनी निर्यात होने दिया पर क्या कार्यवाही हुई ?
5.  2 लाख करोड़ के घोटाले में देश के बेशकीमती प्राकृतिक संसाधनों की खुली लुट हुई है इसकी नैतिक जिम्मेदारी नरेन्द्र मोदी जी किस पर टालेंगें।
हम इन तमाम प्रश्नों के उत्तर सरकार से पूछते हैं।

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