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कोरोना के खतरे को देखते हुए जामा मस्जिद के उप शाही इमाम शबान बुखारी ने ईद और रमजान के लिए एडवायजरी जारी की

धार्मिक जलसों का आयोजन न करने की अपील सभी को सरकारी आदेशों का पालन करने का अनुरोध इस्लाम से सीखने और उसको आत्मसात करने पर जोर पूरे देश को एकजुटता का संदेश देने की कोशिश

दिल्ली : जामा मस्जिद के उप शाही इमाम सैयद शबान बुखारी ने कोविड-19 की पृष्ठभूमि में ईद और रमजान के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने लोगों से रमजान केपवित्र माह में, विशेष रूप से ईद के अवसर पर, किसी भी समय, सामूहिक सभा, धार्मिक जलसे से परहेज करने की अपील की है। इस पहल का उद्देश्य महामारीकी पृष्ठभूमि में लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चत करना है। साथ ही सरकार के सोशल डिस्टेंसिंग संबधी दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करना है।इसे लेकर जल्द ही एक वीडियो शबान बुखारी के सोशल मीडिया अकाउंड्स से जारी किया जाएगा।

जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है और उसकी ओर से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार समुदाय के प्रत्येक सदस्य को अपने घर में रहकरजमात-उल-विदा और ईद अल-फितर की नमाज़ अदा करने की सलाह दी गई है क्योंकि ऐसा करना वायरस के फैलने के खतरे को कम करने में मददगार होगा।इस्लाम से सीख लेने पर जोर देते हुए सैयद शबान ने समुदाय को इस संकट के समय में जरूरतमंद लोगों की मदद करने को कहा है जो इस्लामी संस्कृति काअभिन्न अंग हैं। साझा की गई एडवाइजरी में सभी से अपील की गई है कि वे सोशल डिस्टेंसिंग अपनाएं और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करें।

रमजान के पवित्र माह में दुनियाभर के मुसलमान इस्लाम से जुड़े रीति-रिवाज़ों का पालन करते हैं। इस्लाम के पवित्र माह के दौरान समुदाय के सदस्य सुबह सेशाम तक कड़े रोज़े रखते हैं। अपना रोज़ा खोलने के बाद विशेष तरावीह की नमाज़ अदा करते हैं। ईद आने तक एक महीना इसी दिनचर्या का पालन करते हैं।उल्लेखनीय है कि रमजान का माह पहली बार लॉकडाउन के बीच शुरू हुआ है। सामूहिक जलसों पर प्रतिबंध के कारण मुस्लिम समुदाय घरों में रहकर शुक्रवारऔर तरावीह की नमाज अदा कर रहे हैं। नई एडवायजरी समुदाय को निर्देश देती है कि वे ईद के लिए भी इसका पालन करें, जो इस वर्ष 25 मई को पूरे देश मेंमनाई जाएगी।

जामा मस्जिद के उप शाही इमाम सैयद शबान बुखारी ने लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “हम आंगन और बागों में किसी भी जलसेकी अनुमति नहीं दे सकते क्योंकि यह वायरस के फैलने के जोखिम को बढ़ाएगा। इस वजह से हम आप सभी से अपने घरों से जमात-उल-विदा, नमाज-ए-ईद कीपवित्र नमाज अदा करने का अनुरोध करते हैं। मैं सभी नागरिकों, विशेषकर मुस्लिम समुदाय से अनुरोध करना चाहूंगा कि वे इस अवधि में लॉकडाउन के नियमों कापालन करें और गरीबों व बेसहारा लोगों की मदद करें। साथ ही अल्लाह से दुआ मांगें कि सभी सुरक्षित रहे और इस महामारी से सभी लोग बचे रहें।”

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