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कांग्रेस कार्यसमिति पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धियों की निंदा करती है

नई दिल्ली:  लॉकडाउन के पिछले तीन महीनों के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों और उत्पाद शुल्क में बारबार की जाने वाली अन्यायपूर्ण बढ़ोतरी पर कांग्रेस कार्यसमिति अपनी चिंता और आघात को व्यक्त करती है। केंद्र सरकार द्वारा भारत के लोगों पर ये जबरन वसूली की चोट तब बढ़ाई गई है जब वे कोविड-19 महामारी के कारण पहले ही अभूतपूर्व आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। 

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बिना औचित्य के 17 दिनों से लगातार वृद्धि की है। कुल मिलाकर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों और उत्पाद शुल्क में 14 मार्च, 2020 के बाद से 19 अलगअलग अवसरों पर वृद्धि की गयी है। भारत के लोगों को खसोट कर मुनाफाखोरी रही है। यह इसतथ्य से परिलक्षित होता है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में पेट्रोल पर 9.20 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.46 रुपये प्रतिलीटर पर उत्पाद शुल्क में पेट्रोल पर 23.78 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 28.37 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त बढ़ोतरी कीहै, जो डीजल पर उत्पाद शुल्क में 820 प्रतिशत और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 258 प्रतिशत की समझ से बाहर बढ़ोतरीबनती है।  

हम सरकार को उसकेराज धर्मकी याद दिलाती है। किसी भी सरकार को अपने लोगों पर इस तरह काअस्वीकार्य आर्थिक दबाव नहीं डालना चाहिए, जब वैश्विक महामारी के आर्थिक प्रभाव व्यापारों को नष्ट कर रहे हों, मध्यमवर्ग की आय और बचत को तेजी से ख़त्म कर रहा हों, और किसान खरीफ के मौसम की फसल बोने के लिए संघर्ष कर रहे हों।यदि सरकार ने इस बिना विचार किये उठाये गए क़दमों में सुधार नहीं किया तो इससे विध्वंसकारी परिणाम निकलेंगे, जिसमें कई मध्यम आय वाले परिवारों गरीबी के हाशिए पर धकेल दिया जाएंगे और गरीब पूरी आर्थिक बर्बादी की ओर धकेल दिया जाएंगे।पिछले छह वर्षों में विशेष रूप से कच्चे तेल की ऐतिहासिक रूप से कमवैश्विक कीमतों (यूपीए के कार्यकाल के दौरान प्रचलित मूल्य के पांचवें हिस्से के रूप में कम और 2004 में कच्चे तेल कीअंतर्राष्ट्रीय कीमतों के करीब होने) के दृष्टिगत उपरोक्त परिणाम निश्चित रूप से टालने योग्य हैं। 

दूसरे शब्दों में, वर्तमान सरकार ने पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा नागरिकों को (कम कीमतों का) लाभ पहुंचाने के रास्ते पर चलनेकी बजाय, पिछले छह वर्षों में 12 बार पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने का विकल्प चुना है और पिछले छह वर्षों में अकेलेपेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क से 18,00,000 करोड़ रुपए की चौंका देने वाली राशि वसूली। कांग्रेस कार्य समितिसरकार को याद दिलाती है कि यह पैसा लोगों का है और कर शुल्क लोगों के हितों की सेवा के लिए होते हैं। डीजल औरपेट्रोल की कीमतों और उत्पाद शुल्क में हर वृद्धि, ख़ास रूप से एक महामारी के दौरान वृद्धि प्रशासनिक निष्ठुरता और अन्यायको चिह्नित करती है। राष्ट्र अभूतपूर्व गंभीर स्वास्थ्य और आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा है।कांग्रेस कार्य समिति इस तथ्य की ओर इशारा करती है कि राष्ट्र में तालाबंदी से पहले, दिल्ली में पेट्रोल की औसत कीमतRs.69.60 प्रति लीटर थी। यह अब 79.76 रुपये है। लॉकडाउन से पहले डीजल की कीमत Rs.62.30 प्रति लीटर थी, जो अब79.40 रुपये है। यह वृद्धि अपने आप बोलती है।  गरीब से गरीब व्यक्ति को सीधे नकद हस्तांतरण पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार को आग्रह करतीहै। यदि सरकार अर्थव्यवस्था को किकस्टार्ट करने और उपभोग/मांग को पुनर्जीवित करने के बारे में गंभीर है, तो उसे ऐसे एकपैकेज से ज्यादा की घोषणा करनी चाहिए जो कि सकल घरेलू उत्पाद के 0.8% से भी कम है और जिसमें बड़े पैमाने पर ऋणविकल्प ही दिए गए हैं। कार्यसमिति सरकार से गरीबों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर तंत्र के माध्यम से नकदी काइंजेक्शन लगाकर अर्थव्यवस्था में विश्वास जगाने का आग्रह करती है।

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