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दिल्ली के अंदर 38 अस्पताल हैं और 38 अस्पतालों में से 33 अस्पताल दिल्ली के अंदर कोरोना पैशेंट को ट्रीट नहीं कर रहे-कांग्रेस

दिल्ली एक भयावह स्थिति से गुजर रही है और राष्ट्र की राजधानी होने के बावजूद दोनों सरकारों ने यहाँ पर कोई काम नहीं किया, जिसकी वजह से आज दिल्ली को ऐसी  परेशानी देखने को मिल रही है।  दिल्ली में टेस्टिंग रेट है, पॉजिटिविटी रेट है, वो हिंदुस्तान में आज की तारीख में सबसे ज्यादा है। जहाँ एक दिन पहले हम लोगों की दिल्ली में हर 100 में से 25 लोग पॉजिटिव निकल रहे हैं और जो ठीक होने वाले यानि रिक्वरी रेट, वो भी हमारे देश के अंदर सबसे कम है, पॉजिटिविटी सबसे ज्यादा और रिक्वरी रेट सबसे कम। रिक्वरी रेट इसलिए सबसे कम है, क्योंकि यहाँ दिल्ली के अंदर, नेशनल कैपिटल के अंदर, अस्पतालों का जो हाल है, वो शर्मसार करने वाला है।

दिल्ली के अंदर 3 दिन पहले 8 लैब को सस्पेंड कर दिया गया, ओवर टेस्टिंग कर रहे हैं, पॉजिटिविटी रेट ज्यादा है।  जिन 8 लैब का लाईसेंस कैंसिल किया गया है, वो 4,000 टेस्ट प्रतिदिन करते थे। आप सोचिए कि 4,000 टेस्ट प्रतिदिन करने वाली लेबोरेटरी का लाईसेंस कैंसिल करने से यह सीधे के सीधे आधी टेस्टिंग के ऊपर दिल्ली को ले आएं हैं और यही एक तरीका केजरीवाल सरकार ने चुना है कि इन टेस्टिंग रेट को कम करके दिल्ली के अंदर कोविड केस को अपने पूरे देश भर में दिखाएंगे कि हमारे यहाँ पर ठीक होना शुरु हो गया है। लेकिन साथ-साथ में आंकड़े जो कहते हैं, वो कभी भी किसी से छुपते नहीं है। जैसे 29 मई को दिल्ली में 7,650 टेस्ट हुए थे और कल जो इन्होंने रिलीज किया है, परसों का आंकड़ा, उसमें सिर्फ 5,180 टेस्ट हुए। यानि कि परसों से ही, आज जो आएगा, वो इससे भी कम होगा। लेकिन जो कल रिलीज किया है परसों के टेस्ट में, उसी में 2,500 टेस्ट कम किए गए हैं। यह दिल्ली सरकार के आंकड़े हैं। इस तरह से धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। पूरे देश में टेस्ट के रेट बढ़ रहे हैं और दिल्ली के अंदर कम हो रहे हैं।

अस्पतालों के अंदर एडमिशन नहीं मिल रहे हैं और केजरीवाल साहब कहते हैं कि बाहर के लोगों को आने नहीं देना है।  आप यह जानकर हैरान होंगे कि दिल्ली के अंदर 38 अस्पताल हैं और 38 अस्पतालों में से 33 अस्पताल दिल्ली के अंदर कोरोना पैशेंट को ट्रीट नहीं कर रहे। दिल्ली सरकार के वे अस्पताल रिफ्यूज कर रहे हैं। दिल्ली सरकार के खुद के 38 अस्पताल में से 33 अस्पताल कोरोना पैशेंट को ट्रिट नहीं कर रहे हैं, वो लोगों को वापस भेज रहे हैं और लोगों को कह रहे हैं कि केवल 5 अस्पताल जो कोरोना के लिए हैं। उनको डैडिकेट किया है, वहीं आप जाईए। केजरीवाल साहब दिल्ली तो खुलेगी या नहीं खुलेगी ये बाद की बात है। सबसे पहले जो आपके 38 अस्पताल हैं, उनको तो कोरोना पैशेंट के लिए खोलिए, उसके बाद की बात करें। आपके अपने 38 में से 33 अस्पताल रिफ्यूज कर रहे हैं कोरोना पैशेंट के लिए और  आप कहते हैं आप दिल्ली के बॉर्डर नहीं खोलेंगे।

दिल्ली के अंदर कोरोना के लिए जो 5 अस्पताल दिल्ली ने डैडिकेट किए हैं। उसमें 4,400 बैड हैं  और इन 4,400 बैड में से आपको पता है कि कितने प्रतिशत बैड ऑक्यूपाइड हैं और कितने खाली हैं? दिल्ली में, यहाँ पर लोगों को अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही हैं। जबकि 4,400 में से दिल्ली में मात्र 28 प्रतिशत दिल्ली सरकार के अस्पताल के बैड ऑक्यूपाइड हैं। ये मैं सिर्फ दिल्ली सरकार की बात कर रहा हूं। दिल्ली सरकार के 72 प्रतिशत कोविड़ डेडिकेटेड़ 4,400 बैड में से 72 प्रतिशत खाली हैं और फिर भी दिल्ली की जनता को दर-दर भटकना पड़ रहा है। उनके लिए अस्पतालों में कोई जगह नहीं है और केजरीवाल साहब कह रहे हैं कि हम बाहर से बॉर्डर बंद कर देंगे। पहले अपने दिल्ली के लोगों को, जो बॉर्डर बंद हैं, दिल्ली के लोगों को तो आप कम से कम भर्ती करें। 72 प्रतिशत का मतलब हम लोगों ने ये हिसाब लगाया है कि 4,400 में से 3,156 बैड दिल्ली सरकार के अस्पतालों में खाली हैं और प्राईवेट अस्पताल में ये 40 प्रतिशत खाली हैं। गंगा राम अस्पताल, जिसके अगेंस्ट एफआईआर दिल्ली सरकार ने दायर की है, उसमें सिर्फ 12 प्रतिशत बैड खाली हैं, उसमें 88 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी रेट है। मैं केजरीवाल साहब, आपसे पूछना चाहता हूं कि आप गंगा राम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कीजिए। आपका अधिकार है, आप एक्शन लीजिए, जिसके 88 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी रेट हैं, उनके खिलाफ तो आप एफआईआर दर्ज कर रहे हैं। लेकिन खुद के आपकी ऑक्यूपेंसी रेट 28 प्रतिशत है, इसका क्या जवाब देंगे आप? खुद के आपके 38 अस्पतालों में से 33 अस्पताल रिफ्यूज कर रहे हैं, कोरोना पैशेंट को कि हम नहीं लेंगे। आप अपने अस्पताल जब बंद कर रहे हैं तो आप दूसरों के ऊपर कैसे बात कर सकते हैं?

अब केन्द्र सरकार के ऊपर आ जाते हैं। देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली के अंदर ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ओफ मैडिकल साइंस (AIMS), सफदरजंग अस्पताल, लैडी हार्डिंग अस्पताल, राम मनोहर लोहिया अस्पताल, इस तरीके से दिल्ली के अंदर केन्द्र सरकार का बहुत बड़ा प्रेजेंस है। उसके अलावा दिल्ली के अंदरबहुत सारी ऑटोनोमस इंस्टिट्यूशन हैं, जो सैंट्रल गवर्मेंट ओन करती है। आप हैरान हो जाएंगे यह जानकर कि दिल्ली के अंदर 13,200 बैड सैंट्रल गवर्मेंट के इंस्टिटूशन के हैं और 3,500 बैड एमसीडी के हैं, म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के हैं। दोनों मिलाकर 16,700 बैड हुए। हैरान करने वाली बात ये है कि 16,700 में से सिर्फ 1,502 बैड कोरोना पैशेंट के लिए रिजर्व है। तो इसका क्या जवाब है कि आपके पास जो हैं, टोटल बैड जो सैंट्रल गवर्मेंट के प्रेजेंस हैं, उसमें से सिर्फ 8 प्रतिशत कोरोना पैशेंट के लिए रिजर्व कर रहे हैं और दिल्ली सरकार अपने 38 इंस्टिट्यूशन में से सिर्फ 5 इंस्टिट्यूशन को कोरोना पैशेंट के लिए अलाउ कर रहे हैं। ये महामारी जो भयंकर रुप लेती जा रही है, दिल्ली के लोगों को यहाँ पर जगह नहीं मिल रही है तो उसका क्या जवाब दिल्ली सरकार दे रही है? क्या जवाब केन्द्र सरकार दे रही है, ये हमारी समझ से बाहर है। क्या इनकी तैयारी है, क्या लॉकडाउन पीरियड के अंदर किया है?ये हम सब लोगों की समझ से बाहर है।

हाईकोर्ट ने डिग्निटी ऑफ डेडके ऊपर बहुत बड़ा रिमार्क दिल्ली सरकार और एमसीडी के ऊपर कास्ट किया है। आप हैरान हो जाएंगे कि 5-5 दिन दिल्ली के अंदर शमशान घाट पर लाश कोविड़ प्रोटोकोल से दाह संस्कार के लिए पड़ी रहती है और वहाँ पर उनका दाह संस्कार नहीं होता। लॉकडाउन पीरियड जो तैयारी करने के लिए मिला था, उस दौरान दिल्ली सरकार और म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने क्या किया? जबकि, जो हमारे मृत व्यक्ति हैं, अगर हम उनकी भी डिग्निटी के साथ में संस्कार नहीं कर सकते हैं तो उससे ज्यादा राष्ट्र की राजधानी में शर्म की क्या बात हो सकती है? ये बड़े शर्म की और दुख की बात है।

आईसीएमआर और WHO के नोर्स्ट ये कहते हैं कि जो भी व्यक्ति सिम्टोमेटिक होता है और उसकी मृत्यु हो जाती है, अगर उसका टेस्ट नहीं हुआ होता, तो उस डेड बॉडी का भी टेस्ट होना जरुरी होता है और ये बहुत महत्वपूर्ण है ताकि ट्रेसिंग और ट्रैकिंग किया जा सके। उसके बाद कंटेनमेंट जोन बनाया जाए और वहाँ पर लोगों का ध्यान रखा जाए, ताकि लोगों को पता चल सके कि किसइलाके में कोरोना का वायरस निकला है और उसको तुरंत लॉक किया जा सके। लेकिन WHO और आईसीएमआर के नोर्म्स तीन राज्य फोलो नहीं कर रहे हैं- दिल्ली, वेस्ट बंगाल और तेलंगाना। दिल्ली सरकार सिर्फ इसलिए नहीं कर रही है, क्योंकि जैसे ही इनके डेड व्यक्तियों के टेस्ट करना शुरु कर देंगे तो आप समझ सकते हैं कि संख्या कितनी तेजी से बढ़ जाएगी। आप देखिए कि एक तो इन अस्पताल के अंदर भर्ती नहीं होती है। दूसरा उसके बाद में अगर कोई भी व्यक्ति का टेस्ट ना हो और उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसके बाद भी उसकी टेस्टिंग ना हो तो किस तरीके की ये सरकार है और किस तरह से ये काम कर रहे हैं?ये हमारे लिए बड़े शर्म और दुख की बात है।

कंटेनमेंट जोन, 29 अप्रैल को जब सिर्फ 3,500 केस दिल्ली में थे तो दिल्ली में 102 कंटेनमेंट जोन थे, तो दिल्ली सरकार ने एक नया आईडिया निकाला। उन्होंने कंटेनमेंट जोन की डेफिनेशन चेंज कर दी, ताकि दिल्ली के अंदर कंटेनमेंट जोन भी कम हो जाएं।लोग सब बाहर निकलें, इनका डीजल महंगा, इनका पेट्रोल महंगा खरीदें।शराब की दुकान में लंबी-लंबी लाइन लगाकर 70 प्रतिशत महंगी शराब इनसे खरीदें और इनकी जेब में, दिल्ली सरकार की जेब में पैसा आए और दिल्ली के कंटेनमेंट जोन कम हो जाएं। दिल्ली के अंदर 29 अप्रैल को, जैसा मैं कह रहा था 102 कंटेनमेंट जोन थे, आज की तारीख में जब 3,500 से बढ़कर कुल 28,000 के करीब कोरोना पैंशेट दिल्ली में हैं, तो 3,000 के लगभग 9 गुना, 8 गुना बढ़ गए हैं, लेकिन कंटेनमेंट जोन 102 से सिर्फ 162 हुए हैं।

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