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आखिर जनपद गाजियाबाद की भाजपा में ये कैसी महाभारत ?

दो बड़े सवाल है अगर सरकार और सरकारी अधिकारी अपनी पार्टी के विधायकों सांसदों चैयरमैन और सभासदों पार्षदो की ही नही सुनेंगे तो फिर किसकी सुनेंगे आम जनमानस और विपक्ष की कौन सुनेगा, दूसरा ये नेता आखिर सरकार और सरकारी अधिकारियों को सुनाना क्या चाहते है जो सरकार और सरकारी अधिकारी सुनने को तैयार ही नही है।

ग़ाज़ियाबाद : आखिर जनपद गाजियाबाद की भाजपा में ये कैसी महाभारत है ? ये क्या हो रहा है जनपद गाजियाबाद की भाजपा में पहले जिले के पांचों विधायक मीटिंग करते थे कि अधिकारी हमारी सुनते ही नही फिर लोनी विधायक नन्द किशोर गुर्जर विधानसभा में धरने पर बैठ गए कि हमारी सुनी ही नही जा रही है, सुना है आज लोनी चेयरमैन और उनके लगभग 2 दर्जन से ज्यादा समर्थक सभासद अपने पद से ही त्यागपत्र दे रहे है कारण उनका भी वही की सरकार और सरकारी अधिकारी हमारी सुन ही नही रहे है।
दो बड़े सवाल है अगर सरकार और सरकारी अधिकारी अपनी पार्टी के विधायकों सांसदों चैयरमैन और सभासदों पार्षदो की ही नही सुनेंगे तो फिर किसकी सुनेंगे आम जनमानस और विपक्ष की कौन सुनेगा, दूसरा ये नेता आखिर सरकार और सरकारी अधिकारियों को सुनाना क्या चाहते है जो सरकार और सरकारी अधिकारी सुनने को तैयार ही नही है।
आखिर सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास का नारा देने वाली पार्टी बीजेपी के जन प्रतिनिधियों का अपनी ही सरकार पर क्यों विश्वास नही है । जब भाजपा सरकार अपने ही नेताओ का विश्वास नही जीत पा रही है तो आखिर दूसरे दलों और मुस्लिम समाज के लोगो का विश्वास आखिर कैसे जीतेगी। आखिर ये कैसा सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास है जिस पर खुद भाजपाई ही विश्वास नही कर पा रहे है।
क्या सरकार सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास के नाम पर जनता का बेवकूफ बना रही है या फिर जन प्रतिनिधि अपनी ही सरकार और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलकर समय समय पर जनता का बेवकूफ बनाते रहते है या सरकार और सरकारी अधिकारियों पर अपने मन मुताबिक कार्य करने के लिए बाध्य करने को सरकार पर दबाव बनाते रहते है।
परिस्थितियां चाहे कुछ भी हो मगर सरकार को अपने जन प्रतिनिधियों की बात पहले सुननी चाहिए फिर गुणनी चाहिए फिर जहाँ तक उनकी बात जायज हो माननी भी चाहिए नही तो इस भाजपा सरकार को इस सरकार के अपने जन प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी ही डुबोयेंगे विपक्षी दलों के नेताओ की जरूरत नही पड़ेगी विपक्ष तो चुपचाप बैठकर तमाशा ही देखेगा।
सरकार और कुछ सरकारी अधिकारी इस समय दुर्योधन वाली जिद पर अड़े हुए है कि बेशक सारा राजपाट खत्म हो जाये मगर तुम्हारी तो सुई की नोंक बराबर भी नही सुनेंगे, जबकि जनपद के कुछ जनप्रतिनिधि और भाजपा नेता कार्यकर्ता इस समय पांडवों की तरह इस स्थिति है कि 5 गाँव की चौधराहट के बराबर ही सुन लो साहब हमारी भी और विपक्ष भगवान श्री कृष्ण की तरह मंद मंद मुस्कुरा रहा है कि बजने दो अपने ही परिवार में ही आपस मे ही जूता, और भाजपा जिला अध्यक्ष धृष्टराष्ट्र की भूमिका में है और महानगर अध्यक्ष संजय की तरह जिला अध्यक्ष को कुरुक्षेत्र में चल रहे युद्ध का आँखों देखा हाल बता रहे । आखिर गाजियाबाद की भाजपा में ये कैसी महाभारत है ?
(राजीव कुमार शर्मा) मानव अधिकार पक्षकार।

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