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स्टील में आरसीईपीसमझौता घरेलू विनिर्माण और व्यापार के हितों के ख़िलाफ़

( SAIL ने कहा , NO COMMENTS)

नई दिल्ली , वाणिज्य मंत्रालय द्वारा स्टील पर क्षेत्रीय व्यापकआर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) पर भारत का क्या रूखहो उस पर ट्रेड तथा इंडस्ट्री की एक मीटिंग का आयोजन नई दिल्ली के उद्योग भवनमें हुआ कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स(कैट) सहित अनेक प्रमुख स्टील उत्पादकों एवं संगठनोंने इसमें भाग लिया ! बैठक में वाणिज्य मंत्री श्री पियूष गोयलमौजूद थे !   मीटिंग में कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवालने ने कहा  की देश  में व्यापार संतुलन पहलेसे ही काफी हद तक ठीक नहीं  है। इसलिए भारत कोस्टील और अन्य संबद्ध उत्पादों पर किसी भी आरसीईपीसमझौते पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए।

श्री खंडेलवाल ने कहा की आरसीईपी, जो एक बड़ामुक्त व्यापार समझौता है, आरसीईपी देशों विशेष रूपसे दक्षिण कोरिया और चीन सहित अन्य आरसीपी देशनिर्यात के मोर्चे पर अपेक्षाकृत कम लाभ के साथभारतीय बाजार में अपने माल को  लादेंगे और  इसलिएआरसीईपी समझौते के मामले  में एक सतर्क दृष्टिकोणकी आवश्यकता है। भारत के लिए, टैरिफ दर (आयातशुल्क) आरसीपी समझौते के मामले में बेहद अहम् हैं,क्योंकि आरसीईपी में शामिल सभी देशों के साथ भारतके व्यापार समझौते नहीं हैं। आरसीईपी समझौता स्टील, फार्मास्यूटिकल्स, ई-कॉमर्स, खाद्य प्रसंस्करणऔर कई अन्य क्षेत्रों  पर नकारात्मक प्रभाव डालेगाजिससे इन क्षेत्रों की घरेलू हालत बिगड़ेगी !

भारत का व्यापार घाटा बहुत महत्वपूर्ण है और प्रमुखचिंता का कारण है। 2017-18 में, भारत ने चीन को13.1 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया और $ 73.3 बिलियन का सामान आयात किया, जो 63.1बिलियन डॉलर के व्यापार घाटे का कारण था। भारतको अन्य आरसीईपी देशों के साथ भी व्यापार घाटाउठाना पड़ा है, जैसे कि दक्षिण कोरिया ($ 11.9बिलियन) और ऑस्ट्रेलिया ($ 10.2 बिलियन) जो किभारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक खतरनाक घंटी है।

श्री खंडेलवाल ने कहा की यह ध्यान दिया जाना हैआवश्यक है की  भारत द्वारा  पहले ही दक्षिण कोरियाऔर जापान को टैरिफ रियायतें देकर घरेलू व्यापार कोबहुत नुकसान पहुंचा  है ! मुक्त व्यापार समझौता होने केबाद इन देशों से भारत में निवेश में वृद्धि के बिना स्टीलके आयात में काफी वृद्धि हुई है। चीन ने वैश्विक स्टील बाजार को पूरी तरह से विकृत कर दिया है क्योंकिउनके पास विश्व में स्टील उत्पादन क्षमता 50% है।इसलिए, आरसीईपी के तहत इस क्षेत्र को खोलने सेदेश का घरेलू स्टील उत्पाद बुरी तरह प्रभावित होगा !

उपरोक्त विषय में जब हमने SAIL से ये समझना चाहा पर सेल ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा NO COMMENTS

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